भारत देश में सबसे छोटा देश कौन सा है? - bhaarat desh mein sabase chhota desh kaun sa hai?

एशिया का सबसे छोटा देश, जिसकी रोचक बातें आपको कर देंगी हैरान

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Thu, 29 Oct 2020 10:31 AM IST

दुनिया में ऐसे कई देश हैं, जो बेहद ही छोटे हैं और वहां की आबादी भी कुछ ज्यादा नहीं है। वैसे तो यूरोप महाद्वीप में स्थित वेटिकन सिटी को दुनिया का सबसे छोटा देश माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एशिया महाद्वीप का सबसे छोटा देश कौन सा है? हिंद महासागर में स्थित यह देश बेहद ही खूबसूरत है। यह श्रीलंका से करीब 983 किलोमीटर जबकि भारत के लक्षद्वीप से कीब 793 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आइए जानते हैं इस देश के बारे में खास और रोचक बातें, जिनके बारे में शायद ही आप जानते होंगे...

इस देश का नाम है मालदीव। साल 1965 में इसे अंग्रेजों से आजादी मिली थी। सबसे पहले भारत ने ही इस देश को मान्यता दी थी। 11 नवंबर, 1968 को यहां 853 साल पुरानी राजशाही को समाप्त कर मालदीव को एक गणतंत्र देश घोषित किया गया था। यह जनसंख्या और क्षेत्रफल, दोनों ही प्रकार से एशिया का सबसे छोटा देश है। 2016 की जनगणना के मुताबिक, यहां की कुल आबादी लगभग चार लाख 28 हजार है। 

असल में मालदीव एक द्वीप समूह है। यहां कुल 1,192 टापू हैं, जिसमें से सिर्फ 200 टापूओं पर ही स्थानीय बस्ती है, जबकि कुछ टापू सैलानियों के लिए हैं, जहां खूबसूरत रिजॉर्ट और होटल बनाए गए हैं। एक अनुमान के मुताबिक, हर साल करीब छह लाख सैलानी घूमने के लिहाज से मालदीव आते हैं। 

मालदीव एक मुस्लिम देश है। हालांकि हमेशा से ऐसा नहीं था। 12वीं सदी तक यह देश हिंदू राजाओं के अधीन रहा था, लेकिन बाद में यह बौद्ध धर्म का केंद्र बन गया और धीरे-धीरे समय के साथ यह पूरी तरह से मुस्लिम राष्ट्र में तब्दील हो गया। यहां की सबसे खास बात ये है कि कोई भी गैर मुस्लिम व्यक्ति मालदीव का नागरिक नहीं बन सकता। 

मालदीव पृथ्वी पर मौजूद सभी द्वीपीय देशों में से सबसे नीचे स्थित है। यह समुद्र तल से महज 1.5 मीटर की ऊंचाई पर है। अगर कभी सुनामी आई तो इस देश के डूबने की संभावना सबसे ज्यादा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया की पहली अंडरवॉटर कैबिनेट मीटिंग मालदीव में ही आयोजित की गई थी। साल 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने इस बैठक की अध्यक्षता की थी। 

क्या आप किसी ऐसे देश के बारे में जानते हैं, जहां पर रहने वाले लोगों की कुल जनसंख्या सिर्फ 27 हो? अगर नहीं जानते तो बता दें कि ऐसा एक देश इंग्लैंड के पास स्थित है, जिसका नाम सीलैंड है। इंग्लैंड के सफोल्क समुद्री तट से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सीलैंड खंडहर हो चुके समुद्री किले पर स्थित है, जिसे दूसरे वर्ल्ड वॉर के दौरान ब्रिटेन ने बनाया था। हालांकि, बाद में खाली कर दिया। जानिए कौन है यहां का प्रिंस...

माइक्रो नेशन कहे जाने वाले सीलैंड पर अलग-अलग लोगों का कब्जा रहा। हालांकि, 9 अक्टूबर 2012 को रॉय बेट्स नाम के शख्स ने खुद को सीलैंड का प्रिंस घोषित कर दिया। रॉय बेट्स की मौत के बाद से इस पर उनके बेटे माइकल का शासन है। बता दें कि माइक्रो नेशन वे छोटे देश कहलाते हैं, जिन्हें इंटरनेशनल मान्यता नहीं मिली हुई होती है। सीलैंड का क्षेत्रफल 250 मीटर (0.25 किलोमीटर) ही है। खंडहर हो चुके इस किले को सीलैंड के साथ-साथ रफ फोर्ट के नाम से भी जाना जाता है।

डोनेशन से चलती अर्थव्यवस्था

सीलैंड का क्षेत्रफल काफी कम है, ऐसे में इसके पास आजीविका का कोई साधन नहीं है। ऐसे में जब पहली बार इंटरनेट के जरिए लोगों को इसके बारे में पता चला तो उन्होंने खूब डोनेशन दिया। इससे यहां रहने वाले लोगों को आर्थिक मदद मिली। बता दें कि फेसबुक पर प्रिंसिपैलिटी ऑफ सीलैंड के नाम से इस छोटे देश का एक पेज भी बना है, जिसे लगभग 92 हजार लोगों ने लाइक किया है। वहीं, अब इस छोटे देश की सैर पर अच्छे खासे टूरिस्ट भी पहुंच रहे हैं।

मान्यता प्राप्त सबसे छोटा देश है वेटिकन सिटी

सीलैंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली है। इस कारण से दुनिया का सबसे छोटा देश वेटिकन सिटी है, जिसका क्षेत्रफल 0.44 वर्ग किलोमीटर है। यहां की जनसंख्या 800 है। हालांकि, दिन में इस देश में काम करने वाले लोगों की संख्या 1000 है। यहां पर कई शानदार इमारतें भी हैं, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं।

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विश्व में जहां एक तरफ अमरीका, भारत, रूस, ब्राजील और चीन जैसे बड़े क्षेत्रफल वाले देश हैं वहीं दूसरी तरफ एक देश ऐसा भी है जिसका क्षेत्रफल एक ‘टेनिस कोर्ट’ के समान है. उस देश का नाम सीलैंड है.

सीलैंड का सरफेस एरिया 6000 वर्ग फुट तक फैला है. यह देश इतना छोटा है कि आप गूगल मैप से भी इसकी तलाश नहीं कर सकते. यह देश इंग्लैंड के सफोल्क उत्तरी समुद्री तट से करीब 12 किलो मीटर की दूरी पर स्थित खंडहर बन चुके समुद्री किले पर स्थित है.

माना जाता है कि इस जगह को ब्रिटेन द्वारा दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एंटी-एयरक्राफ्ट डिफेंसिव गन प्लेटफार्म के रूप में बनाया गया था. 2011 के आंकड़े के अनुसार सीलैंड की जनसंख्या सिर्फ 27 लोगों की है.

दरअसल 1967 में रॉय बेट्स नाम एक मेजर ने इस जगह पर कब्जा कर लिया और इसे ब्रिटेन से अलग हटकर एक स्वतंत्र संप्रभु (independent sovereign state) राज्य घोषित कर दिया था. तब रॉय बेट्स अपने परिवार के साथ यहां रहने लगे.


आपको जानकर हैरानी होगी कि रॉय बेट्स ने सीलैंड के लिए डाक टिकट, पास्पोर्ट और करेंसी भी निकाली. करेंसी पर रॉय बेट्स की पत्नी जॉन बेट्स की तस्वीर है. इस देश का अपना एक झंडा भी है जिसका रंग लाल, सफेद और काला है.

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अक्टूबर 2012 में रॉय बेट्स की मृत्यु के बाद उनके बेटे माइकल बेट्स ने खुद को सीलैंड का प्रिंस घोषित कर दिया. माइकल बेट्स अपनी पत्नी लॉरेन और बेटी कारलोट के साथ सीलैंड में रहते हैं.

सीलैंड का क्षेत्रफल बहुत कम है, ऐसे में इसके पास आजीविका का कोई और साधन नहीं है. जब पहली बार इंटरनेट के जरिए लोगों को इसके बारे में पता चला तो उन्होंने खूब डोनेशन दिया. इससे यहां रहने वाले लोगों को आर्थिक मदद मिली.

हालांकि सीलैंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की मान्यता नहीं मिली. अभी तक दुनिया का सबसे छोटा देश वेटिकन सिटी है, जिसका क्षेत्रफल सिर्फ 44 हेक्टर  है. यहां की जनसंख्या 500 के करीब है…Next

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